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Sixteenth Loksabha

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Title:    Need to undertake rejuvenation of ponds in Delhi.

 

श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली) मैं सरकार  का ध्यान दक्षिणी दिल्ली स्थित तालाबों और बावड़ियों की दुर्गति की तरफ दिलाना चाहता हूँ। महोदय, दिल्ली शहर में सैंकड़ों की तादाद में मौजूद तालाब बहुत ही दयनीय स्थिति में हैं जबकि बीते जमाने के लोग तालाबों और बावड़ियों की अहमियत को समझते थे। दिल्ली में 90 के दशक तक तकरीबन 1000 तालाब थे और दिल्ली सरकार के आधिकारिक सूची में वऐाऩ 2000 तक केवल 629 तालाब ही दर्ज थे, असल में इनमें से अधिकांश खराब हाल में हैं और सूखे हैं और गंदगी के ढेर में तब्दील हो चुके हैं तथा खुद दिल्ली सरकार के अनुसार कितनी ही जगहों पर सीवेज और कूड़े के निपटान की सही व्यवस्था होने का खामियाजा भी यह तालाब ही भुगत रहे हैं। दिल्ली में द्वारका के पास स्थित अमराही में ही 11 बीघे का तालाब 4-5 बीघे में सिमट गया। इसी तरह 86 और तालाब भी कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। सन 2000 के हाईकोर्ट द्वारा निर्देश के बावजूद प्रशासन ने तालाबों की देखरेख में तथा पुनरूत्थान में सजगता नहीं दिखाई इसीलिए 2004 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा तीन सदस्यीय निगरानी समिति का गठन भी किया गया। सुप्रीम कोर्ट भी तालाओं और जलाशयों के पुनरूत्थान के लिए काफी सख्त है बावजूद इसके प्रशासन के कानों में जूं नहीं रेंग रही।

          दिल्ली वैसे ही गैस चैम्बर बनता जा रहा है और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी नहीं की जा सकती। मैं आपके माध्यम से दिल्ली सरकार से आग्रह करना चाहूंगा कि तालाबों के पुनरूत्थान के लिए विशेऐा प्रबंध किये जाए एवं इनके रख-रखाव के लिए उचित निर्देश दिए जायें।


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Title:    Need to undertake rejuvenation of ponds in Delhi.

 

श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली) मैं सरकार  का ध्यान दक्षिणी दिल्ली स्थित तालाबों और बावड़ियों की दुर्गति की तरफ दिलाना चाहता हूँ। महोदय, दिल्ली शहर में सैंकड़ों की तादाद में मौजूद तालाब बहुत ही दयनीय स्थिति में हैं जबकि बीते जमाने के लोग तालाबों और बावड़ियों की अहमियत को समझते थे। दिल्ली में 90 के दशक तक तकरीबन 1000 तालाब थे और दिल्ली सरकार के आधिकारिक सूची में वऐाऩ 2000 तक केवल 629 तालाब ही दर्ज थे, असल में इनमें से अधिकांश खराब हाल में हैं और सूखे हैं और गंदगी के ढेर में तब्दील हो चुके हैं तथा खुद दिल्ली सरकार के अनुसार कितनी ही जगहों पर सीवेज और कूड़े के निपटान की सही व्यवस्था होने का खामियाजा भी यह तालाब ही भुगत रहे हैं। दिल्ली में द्वारका के पास स्थित अमराही में ही 11 बीघे का तालाब 4-5 बीघे में सिमट गया। इसी तरह 86 और तालाब भी कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। सन 2000 के हाईकोर्ट द्वारा निर्देश के बावजूद प्रशासन ने तालाबों की देखरेख में तथा पुनरूत्थान में सजगता नहीं दिखाई इसीलिए 2004 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा तीन सदस्यीय निगरानी समिति का गठन भी किया गया। सुप्रीम कोर्ट भी तालाओं और जलाशयों के पुनरूत्थान के लिए काफी सख्त है बावजूद इसके प्रशासन के कानों में जूं नहीं रेंग रही।

          दिल्ली वैसे ही गैस चैम्बर बनता जा रहा है और प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी नहीं की जा सकती। मैं आपके माध्यम से दिल्ली सरकार से आग्रह करना चाहूंगा कि तालाबों के पुनरूत्थान के लिए विशेऐा प्रबंध किये जाए एवं इनके रख-रखाव के लिए उचित निर्देश दिए जायें।


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