Print

Sixteenth Loksabha

an>

Title: Need to relocate people residing in unsafe buildings in Mumbai, Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण): महोदया, आपने मुझे शून्य काल में बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद। आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की पुण्यतिथि है, सर्वप्रथम मैं उन्हें अभिवादन करता हूँ। मैं आज मुंबई की पुरानी इमारतों का विषय उठाना चाहता हूँ। कल हमारे नाना शंकरशेट जी की पुण्यतिथि थी, जिन्हें आद्य: शिल्पकार कहा जाता है, जिन्होंने मुंबई शहर को बसाया।

उन्होंने ही देश में नई रेल शुरू की थी। आज इस मुम्बई शहर की अवस्था इतनी बुरी है कि 30 हजार से ज्यादा इमारतें गिरने वाली हैं, वे बहुत ही दुरावस्था में हैं। 16 हजार इमारतें तो इतनी बुरी हालत में हैं कि वे कभी भी ढह सकती हैं। इस विषय को लेकर मैं बार-बार सदन में बोलता आया हूँ। मैंने हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री जी को भी लेटर लिखा और कहा कि आपने गरीबों के लिए पक्के घर का वादा किया है। यह अच्छी बात है। लेकिन जो लोग कल तक पक्के घरों में थे, हो सकता है कि कल तक वापिस रास्ते पर जाएं। सरकार की तरफ से उनको सुरक्षा देने की आवश्यकता है।

          अध्यक्ष महोदया, उसमें दो विषय हैंएक विषय है कि पुरानी इमारतों को ठीक किया जाए और जो दूसरा विषय है, उसमें कुछ इमारतें केन्द्र सरकार, पोर्ट ट्रस्ट, रेलवे तथा एनटीसी की जमीन पर है और एलआईसी की भी खुद की बिल्डिंग है। ये उन्हें पुनर्विकास की अनुमति नहीं देते और खुद भी रिपेयर नहीं करते हैं। वहाँ बिल्डिंग्स ढह सकते हैं। पोर्ट ट्रस्ट तथा रेल की जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियाँ हैं, लेकिन उनके लिए सरकार की कोई नीति नहीं है। हम गरीबों के लिए पक्के मकान का वादा कर रहे हैं, लेकिन हम उनको कैसे घर देंगे? वहाँ हमारे पास एक स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी है, वह राज्य सरकार की जमीन पर मकान बना सकती है, लेकिन केन्द्र सरकार की जमीन पर मकान नहीं बना सकती है।

          इसलिए, मैं आपके माध्यम से फिर दोबारा सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। मैं कहता हूं कि मुम्बई शहर आपको इनकम टैक्स तथा अन्य टैक्स के रूप में सबसे ज्यादा आमदनी देता है। मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा धन देकर इनको सुरक्षा प्रदान करें। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष: कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल, श्री श्रीरंग आप्पा बारणे,  श्री गजानन कीर्तिकर, डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे, श्री भैरों प्रसाद मिश्र, श्री गोपाल शेट्टी तथा श्री राहुल शेवाले को श्री अरविंद सावंत द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

श्री सुशील कुमार सिंह (औरंगाबाद): धन्यवाद, अध्यक्ष महोदया। अगर आपकी अनुमति हो तो मैं यहीं से बोलूं।

माननीय अध्यक्ष: हाँ, आप बोलिए। आप कहाँ गए थे? मैंने आपका नाम लिया था।

 

 

 

 

an>

Title: Need to relocate people residing in unsafe buildings in Mumbai, Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण): महोदया, आपने मुझे शून्य काल में बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद। आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की पुण्यतिथि है, सर्वप्रथम मैं उन्हें अभिवादन करता हूँ। मैं आज मुंबई की पुरानी इमारतों का विषय उठाना चाहता हूँ। कल हमारे नाना शंकरशेट जी की पुण्यतिथि थी, जिन्हें आद्य: शिल्पकार कहा जाता है, जिन्होंने मुंबई शहर को बसाया।

उन्होंने ही देश में नई रेल शुरू की थी। आज इस मुम्बई शहर की अवस्था इतनी बुरी है कि 30 हजार से ज्यादा इमारतें गिरने वाली हैं, वे बहुत ही दुरावस्था में हैं। 16 हजार इमारतें तो इतनी बुरी हालत में हैं कि वे कभी भी ढह सकती हैं। इस विषय को लेकर मैं बार-बार सदन में बोलता आया हूँ। मैंने हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री जी को भी लेटर लिखा और कहा कि आपने गरीबों के लिए पक्के घर का वादा किया है। यह अच्छी बात है। लेकिन जो लोग कल तक पक्के घरों में थे, हो सकता है कि कल तक वापिस रास्ते पर जाएं। सरकार की तरफ से उनको सुरक्षा देने की आवश्यकता है।

          अध्यक्ष महोदया, उसमें दो विषय हैंएक विषय है कि पुरानी इमारतों को ठीक किया जाए और जो दूसरा विषय है, उसमें कुछ इमारतें केन्द्र सरकार, पोर्ट ट्रस्ट, रेलवे तथा एनटीसी की जमीन पर है और एलआईसी की भी खुद की बिल्डिंग है। ये उन्हें पुनर्विकास की अनुमति नहीं देते और खुद भी रिपेयर नहीं करते हैं। वहाँ बिल्डिंग्स ढह सकते हैं। पोर्ट ट्रस्ट तथा रेल की जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियाँ हैं, लेकिन उनके लिए सरकार की कोई नीति नहीं है। हम गरीबों के लिए पक्के मकान का वादा कर रहे हैं, लेकिन हम उनको कैसे घर देंगे? वहाँ हमारे पास एक स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी है, वह राज्य सरकार की जमीन पर मकान बना सकती है, लेकिन केन्द्र सरकार की जमीन पर मकान नहीं बना सकती है।

          इसलिए, मैं आपके माध्यम से फिर दोबारा सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। मैं कहता हूं कि मुम्बई शहर आपको इनकम टैक्स तथा अन्य टैक्स के रूप में सबसे ज्यादा आमदनी देता है। मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा धन देकर इनको सुरक्षा प्रदान करें। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष: कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल, श्री श्रीरंग आप्पा बारणे,  श्री गजानन कीर्तिकर, डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे, श्री भैरों प्रसाद मिश्र, श्री गोपाल शेट्टी तथा श्री राहुल शेवाले को श्री अरविंद सावंत द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

श्री सुशील कुमार सिंह (औरंगाबाद): धन्यवाद, अध्यक्ष महोदया। अगर आपकी अनुमति हो तो मैं यहीं से बोलूं।

माननीय अध्यक्ष: हाँ, आप बोलिए। आप कहाँ गए थे? मैंने आपका नाम लिया था।

 

 

 

 

an>

Title: Need to relocate people residing in unsafe buildings in Mumbai, Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण): महोदया, आपने मुझे शून्य काल में बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद। आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की पुण्यतिथि है, सर्वप्रथम मैं उन्हें अभिवादन करता हूँ। मैं आज मुंबई की पुरानी इमारतों का विषय उठाना चाहता हूँ। कल हमारे नाना शंकरशेट जी की पुण्यतिथि थी, जिन्हें आद्य: शिल्पकार कहा जाता है, जिन्होंने मुंबई शहर को बसाया।

उन्होंने ही देश में नई रेल शुरू की थी। आज इस मुम्बई शहर की अवस्था इतनी बुरी है कि 30 हजार से ज्यादा इमारतें गिरने वाली हैं, वे बहुत ही दुरावस्था में हैं। 16 हजार इमारतें तो इतनी बुरी हालत में हैं कि वे कभी भी ढह सकती हैं। इस विषय को लेकर मैं बार-बार सदन में बोलता आया हूँ। मैंने हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री जी को भी लेटर लिखा और कहा कि आपने गरीबों के लिए पक्के घर का वादा किया है। यह अच्छी बात है। लेकिन जो लोग कल तक पक्के घरों में थे, हो सकता है कि कल तक वापिस रास्ते पर जाएं। सरकार की तरफ से उनको सुरक्षा देने की आवश्यकता है।

          अध्यक्ष महोदया, उसमें दो विषय हैंएक विषय है कि पुरानी इमारतों को ठीक किया जाए और जो दूसरा विषय है, उसमें कुछ इमारतें केन्द्र सरकार, पोर्ट ट्रस्ट, रेलवे तथा एनटीसी की जमीन पर है और एलआईसी की भी खुद की बिल्डिंग है। ये उन्हें पुनर्विकास की अनुमति नहीं देते और खुद भी रिपेयर नहीं करते हैं। वहाँ बिल्डिंग्स ढह सकते हैं। पोर्ट ट्रस्ट तथा रेल की जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियाँ हैं, लेकिन उनके लिए सरकार की कोई नीति नहीं है। हम गरीबों के लिए पक्के मकान का वादा कर रहे हैं, लेकिन हम उनको कैसे घर देंगे? वहाँ हमारे पास एक स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी है, वह राज्य सरकार की जमीन पर मकान बना सकती है, लेकिन केन्द्र सरकार की जमीन पर मकान नहीं बना सकती है।

          इसलिए, मैं आपके माध्यम से फिर दोबारा सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। मैं कहता हूं कि मुम्बई शहर आपको इनकम टैक्स तथा अन्य टैक्स के रूप में सबसे ज्यादा आमदनी देता है। मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा धन देकर इनको सुरक्षा प्रदान करें। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष: कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल, श्री श्रीरंग आप्पा बारणे,  श्री गजानन कीर्तिकर, डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे, श्री भैरों प्रसाद मिश्र, श्री गोपाल शेट्टी तथा श्री राहुल शेवाले को श्री अरविंद सावंत द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

श्री सुशील कुमार सिंह (औरंगाबाद): धन्यवाद, अध्यक्ष महोदया। अगर आपकी अनुमति हो तो मैं यहीं से बोलूं।

माननीय अध्यक्ष: हाँ, आप बोलिए। आप कहाँ गए थे? मैंने आपका नाम लिया था।

 

 

 

 

an>

Title: Need to relocate people residing in unsafe buildings in Mumbai, Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण): महोदया, आपने मुझे शून्य काल में बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद। आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की पुण्यतिथि है, सर्वप्रथम मैं उन्हें अभिवादन करता हूँ। मैं आज मुंबई की पुरानी इमारतों का विषय उठाना चाहता हूँ। कल हमारे नाना शंकरशेट जी की पुण्यतिथि थी, जिन्हें आद्य: शिल्पकार कहा जाता है, जिन्होंने मुंबई शहर को बसाया।

उन्होंने ही देश में नई रेल शुरू की थी। आज इस मुम्बई शहर की अवस्था इतनी बुरी है कि 30 हजार से ज्यादा इमारतें गिरने वाली हैं, वे बहुत ही दुरावस्था में हैं। 16 हजार इमारतें तो इतनी बुरी हालत में हैं कि वे कभी भी ढह सकती हैं। इस विषय को लेकर मैं बार-बार सदन में बोलता आया हूँ। मैंने हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री जी को भी लेटर लिखा और कहा कि आपने गरीबों के लिए पक्के घर का वादा किया है। यह अच्छी बात है। लेकिन जो लोग कल तक पक्के घरों में थे, हो सकता है कि कल तक वापिस रास्ते पर जाएं। सरकार की तरफ से उनको सुरक्षा देने की आवश्यकता है।

          अध्यक्ष महोदया, उसमें दो विषय