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Sixteenth Loksabha

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Title: Issue regarding providing minimum wages to the poor.

श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली): अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे गरीबों की चिंता से संबंधित एक विषय उठाने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं। दिल्ली और एन.सी.आर. में लाखों मजदूर रहते हैं। दिल्ली के मुख्य मंत्री  ने इन गरीबों को एक बार फिर से ठगा है, उन्होंने उनका न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश दे दिया और न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश देने के बाद उनको कहा गया कि तुम्हारी सैलरी साढ़े पंद्रह, सोलह हजार रुपये कर दी गई है। केवल वाहवाही लूटने के लिए आनन-फानन में यह आदेश दे दिया गया, जिसकी वजह से मजदूर ठगे गए हैं। माननीय उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी कर आदेश को रद्द कर दिया कि दिल्ली सरकार में बैठी वेजिज एडवाइजरी कमेटी ने बिना दिमाग इस्तेमाल किए यह फैसला किया है। कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट हो गया कि दिल्ली के मुख्य मंत्री कैसे चतुराई से गरीब लोगों को मूर्ख बनाने का काम कर रहे हैं।

          मैं आपके माध्यम से मुख्य मंत्री का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि अपने निजी मुकदमों में वह * को वकील करके करोड़ रुपये खर्च करते हैं।

माननीय अध्यक्ष: नाम मत लीजिए।

श्री रमेश बिधूड़ी : मेरा आपसे निवेदन है कि एक तरफ उन पर मुकदमे हैं और दूसरी एडवरटाइजमैंट पर करोड़ों रुपये बर्बाद किये हैं। जब उनके बीस विधायकों के खिलाफ मामला आया तो उन्होंने बड़े-बड़े वकील खड़े किए। मुझे लगता है कि दिल्ली हाई कोर्ट में उन्होंने उद्योगपतियों को यह कह दिया कि तुम कोर्ट चले जाओ और चूंकि वहां सरकार ने उसको ध्यान से नहीं देखा और उस आदेश को रद्द कर दिया। उन गरीबों ने अपने बजट भी उसी हिसाब से बना लिए, वे गरीब मजदूर लोग लोग किराये के मकानों में रहते हैं।

          मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार वेजिज एडवाइजरी कमेटी दिल्ली को आदेश दे और जो इस प्रकार के औद्योगिक लोग हैं, उनको बैठाकर इस मामले को निपटाए, जिससे उन गरीब लोगों को न्यूनतम मजदूरी मिल सके। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष:

 

श्रीमती मीनाक्षी लेखी,

 

कुंवर पुष्पेन्द्र  सिंह चन्देल तथा

 

श्री भैरों प्रसाद मिश्र को श्री रमेश बिधूड़ी द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Issue regarding providing minimum wages to the poor.

श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली): अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे गरीबों की चिंता से संबंधित एक विषय उठाने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं। दिल्ली और एन.सी.आर. में लाखों मजदूर रहते हैं। दिल्ली के मुख्य मंत्री  ने इन गरीबों को एक बार फिर से ठगा है, उन्होंने उनका न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश दे दिया और न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश देने के बाद उनको कहा गया कि तुम्हारी सैलरी साढ़े पंद्रह, सोलह हजार रुपये कर दी गई है। केवल वाहवाही लूटने के लिए आनन-फानन में यह आदेश दे दिया गया, जिसकी वजह से मजदूर ठगे गए हैं। माननीय उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी कर आदेश को रद्द कर दिया कि दिल्ली सरकार में बैठी वेजिज एडवाइजरी कमेटी ने बिना दिमाग इस्तेमाल किए यह फैसला किया है। कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट हो गया कि दिल्ली के मुख्य मंत्री कैसे चतुराई से गरीब लोगों को मूर्ख बनाने का काम कर रहे हैं।

          मैं आपके माध्यम से मुख्य मंत्री का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि अपने निजी मुकदमों में वह * को वकील करके करोड़ रुपये खर्च करते हैं।

माननीय अध्यक्ष: नाम मत लीजिए।

श्री रमेश बिधूड़ी : मेरा आपसे निवेदन है कि एक तरफ उन पर मुकदमे हैं और दूसरी एडवरटाइजमैंट पर करोड़ों रुपये बर्बाद किये हैं। जब उनके बीस विधायकों के खिलाफ मामला आया तो उन्होंने बड़े-बड़े वकील खड़े किए। मुझे लगता है कि दिल्ली हाई कोर्ट में उन्होंने उद्योगपतियों को यह कह दिया कि तुम कोर्ट चले जाओ और चूंकि वहां सरकार ने उसको ध्यान से नहीं देखा और उस आदेश को रद्द कर दिया। उन गरीबों ने अपने बजट भी उसी हिसाब से बना लिए, वे गरीब मजदूर लोग लोग किराये के मकानों में रहते हैं।

          मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार वेजिज एडवाइजरी कमेटी दिल्ली को आदेश दे और जो इस प्रकार के औद्योगिक लोग हैं, उनको बैठाकर इस मामले को निपटाए, जिससे उन गरीब लोगों को न्यूनतम मजदूरी मिल सके। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष:

 

श्रीमती मीनाक्षी लेखी,

 

कुंवर पुष्पेन्द्र  सिंह चन्देल तथा

 

श्री भैरों प्रसाद मिश्र को श्री रमेश बिधूड़ी द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली): अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे गरीबों की चिंता से संबंधित एक विषय उठाने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं। दिल्ली और एन.सी.आर. में लाखों मजदूर रहते हैं। दिल्ली के मुख्य मंत्री  ने इन गरीबों को एक बार फिर से ठगा है, उन्होंने उनका न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश दे दिया और न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश देने के बाद उनको कहा गया कि तुम्हारी सैलरी साढ़े पंद्रह, सोलह हजार रुपये कर दी गई है। केवल वाहवाही लूटने के लिए आनन-फानन में यह आदेश दे दिया गया, जिसकी वजह से मजदूर ठगे गए हैं। माननीय उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी कर आदेश को रद्द कर दिया कि दिल्ली सरकार में बैठी वेजिज एडवाइजरी कमेटी ने बिना दिमाग इस्तेमाल किए यह फैसला किया है। कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट हो गया कि दिल्ली के मुख्य मंत्री कैसे चतुराई से गरीब लोगों को मूर्ख बनाने का काम कर रहे हैं।

          मैं आपके माध्यम से मुख्य मंत्री का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि अपने निजी मुकदमों में वह * को वकील करके करोड़ रुपये खर्च करते हैं।

माननीय अध्यक्ष: नाम मत लीजिए।

श्री रमेश बिधूड़ी : मेरा आपसे निवेदन है कि एक तरफ उन पर मुकदमे हैं और दूसरी एडवरटाइजमैंट पर करोड़ों रुपये बर्बाद किये हैं। जब उनके बीस विधायकों के खिलाफ मामला आया तो उन्होंने बड़े-बड़े वकील खड़े किए। मुझे लगता है कि दिल्ली हाई कोर्ट में उन्होंने उद्योगपतियों को यह कह दिया कि तुम कोर्ट चले जाओ और चूंकि वहां सरकार ने उसको ध्यान से नहीं देखा और उस आदेश को रद्द कर दिया। उन गरीबों ने अपने बजट भी उसी हिसाब से बना लिए, वे गरीब मजदूर लोग लोग किराये के मकानों में रहते हैं।

          मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार वेजिज एडवाइजरी कमेटी दिल्ली को आदेश दे और जो इस प्रकार के औद्योगिक लोग हैं, उनको बैठाकर इस मामले को निपटाए, जिससे उन गरीब लोगों को न्यूनतम मजदूरी मिल सके। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष:

 

श्रीमती मीनाक्षी लेखी,

 

कुंवर पुष्पेन्द्र  सिंह चन्देल तथा

 

श्री भैरों प्रसाद मिश्र को श्री रमेश बिधूड़ी द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली): अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे गरीबों की चिंता से संबंधित एक विषय उठाने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं। दिल्ली और एन.सी.आर. में लाखों मजदूर रहते हैं। दिल्ली के मुख्य मंत्री  ने इन गरीबों को एक बार फिर से ठगा है, उन्होंने उनका न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश दे दिया और न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश देने के बाद उनको कहा गया कि तुम्हारी सैलरी साढ़े पंद्रह, सोलह हजार रुपये कर दी गई है। केवल वाहवाही लूटने के लिए आनन-फानन में यह आदेश दे दिया गया, जिसकी वजह से मजदूर ठगे गए हैं। माननीय उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी कर आदेश को रद्द कर दिया कि दिल्ली सरकार में बैठी वेजिज एडवाइजरी कमेटी ने बिना दिमाग इस्तेमाल किए यह फैसला किया है। कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट हो गया कि दिल्ली के मुख्य मंत्री कैसे चतुराई से गरीब लोगों को मूर्ख बनाने का काम कर रहे हैं।

          मैं आपके माध्यम से मुख्य मंत्री का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि अपने निजी मुकदमों में वह * को वकील करके करोड़ रुपये खर्च करते हैं।

माननीय अध्यक्ष: नाम मत लीजिए।

श्री रमेश बिधूड़ी : मेरा आपसे निवेदन है कि एक तरफ उन पर मुकदमे हैं और दूसरी एडवरटाइजमैंट पर करोड़ों रुपये बर्बाद किये हैं। जब उनके बीस विधायकों के खिलाफ मामला आया तो उन्होंने बड़े-बड़े वकील खड़े किए। मुझे लगता है कि दिल्ली हाई कोर्ट में उन्होंने उद्योगपतियों को यह कह दिया कि तुम कोर्ट चले जाओ और चूंकि वहां सरकार ने उसको ध्यान से नहीं देखा और उस आदेश को रद्द कर दिया। उन गरीबों ने अपने बजट भी उसी हिसाब से बना लिए, वे गरीब मजदूर लोग लोग किराये के मकानों में रहते हैं।

          मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार वेजिज एडवाइजरी कमेटी दिल्ली को आदेश दे और जो इस प्रकार के औद्योगिक लोग हैं, उनको बैठाकर इस मामले को निपटाए, जिससे उन गरीब लोगों को न्यूनतम मजदूरी मिल सके। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष:

 

श्रीमती मीनाक्षी लेखी,

 

कुंवर पुष्पेन्द्र  सिंह चन्देल तथा

 

श्री भैरों प्रसाद मिश्र को श्री रमेश बिधूड़ी द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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Title: Issue regarding providing minimum wages to the poor.

श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली): अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे गरीबों की चिंता से संबंधित एक विषय उठाने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद करता हूं। दिल्ली और एन.सी.आर. में लाखों मजदूर रहते हैं। दिल्ली के मुख्य मंत्री  ने इन गरीबों को एक बार फिर से ठगा है, उन्होंने उनका न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश दे दिया और न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश देने के बाद उनको कहा गया कि तुम्हारी सैलरी साढ़े पंद्रह, सोलह हजार रुपये कर दी गई है। केवल वाहवाही लूटने के लिए आनन-फानन में यह आदेश दे दिया गया, जिसकी वजह से मजदूर ठगे गए हैं। माननीय उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी कर आदेश को रद्द कर दिया कि दिल्ली सरकार में बैठी वेजिज एडवाइजरी कमेटी ने बिना दिमाग इस्तेमाल किए यह फैसला किया है। कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट हो गया कि दिल्ली के मुख्य मंत्री कैसे चतुराई से गरीब लोगों को मूर्ख बनाने का काम कर रहे हैं।

          मैं आपके माध्यम से मुख्य मंत्री का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि अपने निजी मुकदमों में वह * को वकील करके करोड़ रुपये खर्च करते हैं।

माननीय अध्यक्ष: नाम मत लीजिए।

श्री रमेश बिधूड़ी : मेरा आपसे निवेदन है कि एक तरफ उन पर मुकदमे हैं और दूसरी एडवरटाइजमैंट पर करोड़ों रुपये बर्बाद किये हैं। जब उनके बीस विधायकों के खिलाफ मामला आया तो उन्होंने बड़े-बड़े वकील खड़े किए। मुझे लगता है कि दिल्ली हाई कोर्ट में उन्होंने उद्योगपतियों को यह कह दिया कि तुम कोर्ट चले जाओ और चूंकि वहां सरकार ने उसको ध्यान से नहीं देखा और उस आदेश को रद्द कर दिया। उन गरीबों ने अपने बजट भी उसी हिसाब से बना लिए, वे गरीब मजदूर लोग लोग किराये के मकानों में रहते हैं।

          मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि केन्द्र सरकार वेजिज एडवाइजरी कमेटी दिल्ली को आदेश दे और जो इस प्रकार के औद्योगिक लोग हैं, उनको बैठाकर इस मामले को निपटाए, जिससे उन गरीब लोगों को न्यूनतम मजदूरी मिल सके। धन्यवाद।

माननीय अध्यक्ष:

 

श्रीमती मीनाक्षी लेखी,

 

कुंवर पुष्पेन्द्र  सिंह चन्देल तथा

 

श्री भैरों प्रसाद मिश्र को श्री रमेश बिधूड़ी द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

 

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