Print

Sixteenth Loksabha

an>

Title: Need to promote tourism in Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण):उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

          महोदय, आज 9 अगस्त है और क्रांतिदिवस है। आज के ही दिन भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत हुई थी। भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले और स्वराज का सपना दिखाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने देश को स्वराज का सपना सबसे पहले दिखाया था ।

          महोदय, महाराष्ट्र में करीब 424-500 तक किले हैं। इन दुर्गों की देखभाल के लिए केन्द्र की एएसआई और राज्य सरकार की एजेंसी है। लेकिन इन किलों में से केवल 84 की रजिस्ट्री हुई है। हम बार-बार कह रहे हैं कि हमारे ऐतिहासिक किलों का जो धन है उसे बरकरार रखना है। आने वाली पीढ़ी को इन्स्पिरेशन देने के लिए यही किले हैं। उस दिन मुझे टूरिज्म के प्रश्न पर भी यही पूछना था कि हम स्वदेश टूरिज्म कर रहे हैं, तीर्थ टूरिज्म कर रहे हैं, लेकिन किलों का टूरिज्म भी होना चाहिए, जिनसे हमने लड़ाइयां लड़ी हैं और देश को स्वराज का सपना दिखाया है, सुराज भी लाए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के 350 किले हैं। रायगढ़ उनकी राजधानी थी और वहां के किले की एक मेकडोमरी बनानी थी, जिसको बनाने की अनुमति देने  में अधिकारियों ने 14 वर्ष लगा दिए । उसके बाद वे कहने लगे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला उसमें नहीं बैठा सकते हैं। होड़ीसम्हाल के नाम से उस किले पर वह जगह है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं और हमारे पक्ष प्रमुख  आदरणीय उद्धव ठाकरे साहब ने आदरणीय प्रधान मंत्री जी से बात की थी कि ये सारे किले राज्य को दे दिए जाएं । हम इन किलों का जीर्णोद्धार कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को इंस्पिरेशन देने का काम कर सकते हैं। इस पर सरकार ध्यान दे, यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

HON. DEPUTY SPEAKER : Dr. Shrikant Eknath Shinde, Shri Rahul Shewale, Shri Rajan Vichare, Shri Bhairon Prasad Mishra, Dr. Kulmani Samal and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Arvind Sawant.

an>

Title: Need to promote tourism in Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण):उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

          महोदय, आज 9 अगस्त है और क्रांतिदिवस है। आज के ही दिन भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत हुई थी। भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले और स्वराज का सपना दिखाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने देश को स्वराज का सपना सबसे पहले दिखाया था ।

          महोदय, महाराष्ट्र में करीब 424-500 तक किले हैं। इन दुर्गों की देखभाल के लिए केन्द्र की एएसआई और राज्य सरकार की एजेंसी है। लेकिन इन किलों में से केवल 84 की रजिस्ट्री हुई है। हम बार-बार कह रहे हैं कि हमारे ऐतिहासिक किलों का जो धन है उसे बरकरार रखना है। आने वाली पीढ़ी को इन्स्पिरेशन देने के लिए यही किले हैं। उस दिन मुझे टूरिज्म के प्रश्न पर भी यही पूछना था कि हम स्वदेश टूरिज्म कर रहे हैं, तीर्थ टूरिज्म कर रहे हैं, लेकिन किलों का टूरिज्म भी होना चाहिए, जिनसे हमने लड़ाइयां लड़ी हैं और देश को स्वराज का सपना दिखाया है, सुराज भी लाए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के 350 किले हैं। रायगढ़ उनकी राजधानी थी और वहां के किले की एक मेकडोमरी बनानी थी, जिसको बनाने की अनुमति देने  में अधिकारियों ने 14 वर्ष लगा दिए । उसके बाद वे कहने लगे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला उसमें नहीं बैठा सकते हैं। होड़ीसम्हाल के नाम से उस किले पर वह जगह है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं और हमारे पक्ष प्रमुख  आदरणीय उद्धव ठाकरे साहब ने आदरणीय प्रधान मंत्री जी से बात की थी कि ये सारे किले राज्य को दे दिए जाएं । हम इन किलों का जीर्णोद्धार कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को इंस्पिरेशन देने का काम कर सकते हैं। इस पर सरकार ध्यान दे, यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

HON. DEPUTY SPEAKER : Dr. Shrikant Eknath Shinde, Shri Rahul Shewale, Shri Rajan Vichare, Shri Bhairon Prasad Mishra, Dr. Kulmani Samal and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Arvind Sawant.

an>

Title: Need to promote tourism in Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण):उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

          महोदय, आज 9 अगस्त है और क्रांतिदिवस है। आज के ही दिन भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत हुई थी। भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले और स्वराज का सपना दिखाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने देश को स्वराज का सपना सबसे पहले दिखाया था ।

          महोदय, महाराष्ट्र में करीब 424-500 तक किले हैं। इन दुर्गों की देखभाल के लिए केन्द्र की एएसआई और राज्य सरकार की एजेंसी है। लेकिन इन किलों में से केवल 84 की रजिस्ट्री हुई है। हम बार-बार कह रहे हैं कि हमारे ऐतिहासिक किलों का जो धन है उसे बरकरार रखना है। आने वाली पीढ़ी को इन्स्पिरेशन देने के लिए यही किले हैं। उस दिन मुझे टूरिज्म के प्रश्न पर भी यही पूछना था कि हम स्वदेश टूरिज्म कर रहे हैं, तीर्थ टूरिज्म कर रहे हैं, लेकिन किलों का टूरिज्म भी होना चाहिए, जिनसे हमने लड़ाइयां लड़ी हैं और देश को स्वराज का सपना दिखाया है, सुराज भी लाए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के 350 किले हैं। रायगढ़ उनकी राजधानी थी और वहां के किले की एक मेकडोमरी बनानी थी, जिसको बनाने की अनुमति देने  में अधिकारियों ने 14 वर्ष लगा दिए । उसके बाद वे कहने लगे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला उसमें नहीं बैठा सकते हैं। होड़ीसम्हाल के नाम से उस किले पर वह जगह है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं और हमारे पक्ष प्रमुख  आदरणीय उद्धव ठाकरे साहब ने आदरणीय प्रधान मंत्री जी से बात की थी कि ये सारे किले राज्य को दे दिए जाएं । हम इन किलों का जीर्णोद्धार कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को इंस्पिरेशन देने का काम कर सकते हैं। इस पर सरकार ध्यान दे, यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

HON. DEPUTY SPEAKER : Dr. Shrikant Eknath Shinde, Shri Rahul Shewale, Shri Rajan Vichare, Shri Bhairon Prasad Mishra, Dr. Kulmani Samal and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Arvind Sawant.

an>

Title: Need to promote tourism in Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण):उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

          महोदय, आज 9 अगस्त है और क्रांतिदिवस है। आज के ही दिन भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत हुई थी। भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले और स्वराज का सपना दिखाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने देश को स्वराज का सपना सबसे पहले दिखाया था ।

          महोदय, महाराष्ट्र में करीब 424-500 तक किले हैं। इन दुर्गों की देखभाल के लिए केन्द्र की एएसआई और राज्य सरकार की एजेंसी है। लेकिन इन किलों में से केवल 84 की रजिस्ट्री हुई है। हम बार-बार कह रहे हैं कि हमारे ऐतिहासिक किलों का जो धन है उसे बरकरार रखना है। आने वाली पीढ़ी को इन्स्पिरेशन देने के लिए यही किले हैं। उस दिन मुझे टूरिज्म के प्रश्न पर भी यही पूछना था कि हम स्वदेश टूरिज्म कर रहे हैं, तीर्थ टूरिज्म कर रहे हैं, लेकिन किलों का टूरिज्म भी होना चाहिए, जिनसे हमने लड़ाइयां लड़ी हैं और देश को स्वराज का सपना दिखाया है, सुराज भी लाए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के 350 किले हैं। रायगढ़ उनकी राजधानी थी और वहां के किले की एक मेकडोमरी बनानी थी, जिसको बनाने की अनुमति देने  में अधिकारियों ने 14 वर्ष लगा दिए । उसके बाद वे कहने लगे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला उसमें नहीं बैठा सकते हैं। होड़ीसम्हाल के नाम से उस किले पर वह जगह है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं और हमारे पक्ष प्रमुख  आदरणीय उद्धव ठाकरे साहब ने आदरणीय प्रधान मंत्री जी से बात की थी कि ये सारे किले राज्य को दे दिए जाएं । हम इन किलों का जीर्णोद्धार कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को इंस्पिरेशन देने का काम कर सकते हैं। इस पर सरकार ध्यान दे, यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

HON. DEPUTY SPEAKER : Dr. Shrikant Eknath Shinde, Shri Rahul Shewale, Shri Rajan Vichare, Shri Bhairon Prasad Mishra, Dr. Kulmani Samal and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Arvind Sawant.

an>

Title: Need to promote tourism in Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण):उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

          महोदय, आज 9 अगस्त है और क्रांतिदिवस है। आज के ही दिन भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत हुई थी। भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले और स्वराज का सपना दिखाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने देश को स्वराज का सपना सबसे पहले दिखाया था ।

          महोदय, महाराष्ट्र में करीब 424-500 तक किले हैं। इन दुर्गों की देखभाल के लिए केन्द्र की एएसआई और राज्य सरकार की एजेंसी है। लेकिन इन किलों में से केवल 84 की रजिस्ट्री हुई है। हम बार-बार कह रहे हैं कि हमारे ऐतिहासिक किलों का जो धन है उसे बरकरार रखना है। आने वाली पीढ़ी को इन्स्पिरेशन देने के लिए यही किले हैं। उस दिन मुझे टूरिज्म के प्रश्न पर भी यही पूछना था कि हम स्वदेश टूरिज्म कर रहे हैं, तीर्थ टूरिज्म कर रहे हैं, लेकिन किलों का टूरिज्म भी होना चाहिए, जिनसे हमने लड़ाइयां लड़ी हैं और देश को स्वराज का सपना दिखाया है, सुराज भी लाए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के 350 किले हैं। रायगढ़ उनकी राजधानी थी और वहां के किले की एक मेकडोमरी बनानी थी, जिसको बनाने की अनुमति देने  में अधिकारियों ने 14 वर्ष लगा दिए । उसके बाद वे कहने लगे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला उसमें नहीं बैठा सकते हैं। होड़ीसम्हाल के नाम से उस किले पर वह जगह है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं और हमारे पक्ष प्रमुख  आदरणीय उद्धव ठाकरे साहब ने आदरणीय प्रधान मंत्री जी से बात की थी कि ये सारे किले राज्य को दे दिए जाएं । हम इन किलों का जीर्णोद्धार कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को इंस्पिरेशन देने का काम कर सकते हैं। इस पर सरकार ध्यान दे, यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

HON. DEPUTY SPEAKER : Dr. Shrikant Eknath Shinde, Shri Rahul Shewale, Shri Rajan Vichare, Shri Bhairon Prasad Mishra, Dr. Kulmani Samal and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Arvind Sawant.

an>

Title: Need to promote tourism in Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण):उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

          महोदय, आज 9 अगस्त है और क्रांतिदिवस है। आज के ही दिन भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत हुई थी। भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले और स्वराज का सपना दिखाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने देश को स्वराज का सपना सबसे पहले दिखाया था ।

          महोदय, महाराष्ट्र में करीब 424-500 तक किले हैं। इन दुर्गों की देखभाल के लिए केन्द्र की एएसआई और राज्य सरकार की एजेंसी है। लेकिन इन किलों में से केवल 84 की रजिस्ट्री हुई है। हम बार-बार कह रहे हैं कि हमारे ऐतिहासिक किलों का जो धन है उसे बरकरार रखना है। आने वाली पीढ़ी को इन्स्पिरेशन देने के लिए यही किले हैं। उस दिन मुझे टूरिज्म के प्रश्न पर भी यही पूछना था कि हम स्वदेश टूरिज्म कर रहे हैं, तीर्थ टूरिज्म कर रहे हैं, लेकिन किलों का टूरिज्म भी होना चाहिए, जिनसे हमने लड़ाइयां लड़ी हैं और देश को स्वराज का सपना दिखाया है, सुराज भी लाए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के 350 किले हैं। रायगढ़ उनकी राजधानी थी और वहां के किले की एक मेकडोमरी बनानी थी, जिसको बनाने की अनुमति देने  में अधिकारियों ने 14 वर्ष लगा दिए । उसके बाद वे कहने लगे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला उसमें नहीं बैठा सकते हैं। होड़ीसम्हाल के नाम से उस किले पर वह जगह है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं और हमारे पक्ष प्रमुख  आदरणीय उद्धव ठाकरे साहब ने आदरणीय प्रधान मंत्री जी से बात की थी कि ये सारे किले राज्य को दे दिए जाएं । हम इन किलों का जीर्णोद्धार कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को इंस्पिरेशन देने का काम कर सकते हैं। इस पर सरकार ध्यान दे, यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

HON. DEPUTY SPEAKER : Dr. Shrikant Eknath Shinde, Shri Rahul Shewale, Shri Rajan Vichare, Shri Bhairon Prasad Mishra, Dr. Kulmani Samal and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Arvind Sawant.

an>

Title: Need to promote tourism in Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण):उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

          महोदय, आज 9 अगस्त है और क्रांतिदिवस है। आज के ही दिन भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत हुई थी। भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले और स्वराज का सपना दिखाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने देश को स्वराज का सपना सबसे पहले दिखाया था ।

          महोदय, महाराष्ट्र में करीब 424-500 तक किले हैं। इन दुर्गों की देखभाल के लिए केन्द्र की एएसआई और राज्य सरकार की एजेंसी है। लेकिन इन किलों में से केवल 84 की रजिस्ट्री हुई है। हम बार-बार कह रहे हैं कि हमारे ऐतिहासिक किलों का जो धन है उसे बरकरार रखना है। आने वाली पीढ़ी को इन्स्पिरेशन देने के लिए यही किले हैं। उस दिन मुझे टूरिज्म के प्रश्न पर भी यही पूछना था कि हम स्वदेश टूरिज्म कर रहे हैं, तीर्थ टूरिज्म कर रहे हैं, लेकिन किलों का टूरिज्म भी होना चाहिए, जिनसे हमने लड़ाइयां लड़ी हैं और देश को स्वराज का सपना दिखाया है, सुराज भी लाए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के 350 किले हैं। रायगढ़ उनकी राजधानी थी और वहां के किले की एक मेकडोमरी बनानी थी, जिसको बनाने की अनुमति देने  में अधिकारियों ने 14 वर्ष लगा दिए । उसके बाद वे कहने लगे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला उसमें नहीं बैठा सकते हैं। होड़ीसम्हाल के नाम से उस किले पर वह जगह है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं और हमारे पक्ष प्रमुख  आदरणीय उद्धव ठाकरे साहब ने आदरणीय प्रधान मंत्री जी से बात की थी कि ये सारे किले राज्य को दे दिए जाएं । हम इन किलों का जीर्णोद्धार कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को इंस्पिरेशन देने का काम कर सकते हैं। इस पर सरकार ध्यान दे, यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

HON. DEPUTY SPEAKER : Dr. Shrikant Eknath Shinde, Shri Rahul Shewale, Shri Rajan Vichare, Shri Bhairon Prasad Mishra, Dr. Kulmani Samal and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Arvind Sawant.

an>

Title: Need to promote tourism in Maharashtra.

श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण):उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

          महोदय, आज 9 अगस्त है और क्रांतिदिवस है। आज के ही दिन भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत हुई थी। भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले और स्वराज का सपना दिखाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। उन्होंने देश को स्वराज का सपना सबसे पहले दिखाया था ।

          महोदय, महाराष्ट्र में करीब 424-500 तक किले हैं। इन दुर्गों की देखभाल के लिए केन्द्र की एएसआई और राज्य सरकार की एजेंसी है। लेकिन इन किलों में से केवल 84 की रजिस्ट्री हुई है। हम बार-बार कह रहे हैं कि हमारे ऐतिहासिक किलों का जो धन है उसे बरकरार रखना है। आने वाली पीढ़ी को इन्स्पिरेशन देने के लिए यही किले हैं। उस दिन मुझे टूरिज्म के प्रश्न पर भी यही पूछना था कि हम स्वदेश टूरिज्म कर रहे हैं, तीर्थ टूरिज्म कर रहे हैं, लेकिन किलों का टूरिज्म भी होना चाहिए, जिनसे हमने लड़ाइयां लड़ी हैं और देश को स्वराज का सपना दिखाया है, सुराज भी लाए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के 350 किले हैं। रायगढ़ उनकी राजधानी थी और वहां के किले की एक मेकडोमरी बनानी थी, जिसको बनाने की अनुमति देने  में अधिकारियों ने 14 वर्ष लगा दिए । उसके बाद वे कहने लगे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला उसमें नहीं बैठा सकते हैं। होड़ीसम्हाल के नाम से उस किले पर वह जगह है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का पुतला है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं और हमारे पक्ष प्रमुख  आदरणीय उद्धव ठाकरे साहब ने आदरणीय प्रधान मंत्री जी से बात की थी कि ये सारे किले राज्य को दे दिए जाएं । हम इन किलों का जीर्णोद्धार कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को इंस्पिरेशन देने का काम कर सकते हैं। इस पर सरकार ध्यान दे, यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

HON. DEPUTY SPEAKER : Dr. Shrikant Eknath Shinde, Shri Rahul Shewale, Shri Rajan Vichare, Shri Bhairon Prasad Mishra, Dr. Kulmani Samal and Kunwar Pushpendra Singh Chandel are permitted to associate with the issue raised by Shri Arvind Sawant.

Developed and Hosted by National Informatics Centre (NIC)
Content on this website is published, managed & maintained by Software Unit, Computer (HW & SW) Management. Branch, Lok Sabha Secretariat