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Seventeenth Loksabha

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Title: Discussion on the motion for consideration of the Jammu and Kashmir Official Languages Bill, 2020 (Bill Passed).

माननीय अध्यक्ष : आइटम नम्बर 19.

SHRI G. KISHAN REDDY: I beg to move:

“That the Bill to provide for the languages to be used for the official purposes of the Union territory of Jammu and Kashmir and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration.”

माननीय अध्यक्ष : प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ :

“That the Bill to provide for the languages to be used for the official purposes of the Union territory of Jammu and Kashmir and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration.”

 

श्री हसनैन मसूदी (अनन्तनाग): जनाब, मैं पूरी बात कहूँगा । पहले मैंने गुजारिश की कि यह कानून, लेजिस्लेटिव कम्पीटेंस नहीं है । अब कानून पर जाइए । देखिए, क्या कहीं पर ऐसा कोई कनफ्यूजन है, मुल्क के किसी भी रीजन में इंट्रोड्यूस किया गया, जहां पर पाँच जबानें इकट्ठी तौर पर लगाई गईं । जनाब देखिए, कश्मीरी और डोगरी, डोंगरी नहीं है, डोगरी है, मंत्री जी को शायद अपना तलाफ्फुस ठीक करना होगा । डोगरी पहले ही 8th शेड्यूल का हिस्सा है । इनका कहना है कि 0.16 परसेंट सिर्फ उर्दू बोलते हैं । आप मंत्री जी से पूछिएगा कि फिर उर्दू को सरकारी जबान रखने की आपको क्यों जरूरत पड़ती है? अगर आपकी ही बात मानी जाए, सदन को जो भी कहा जाए, अगर आप कहते हैं कि 0.16 परसेंट है, लेकिन यह फैक्ट नहीं है । This is a misstatement of fact. उर्दू   इस वक्त सारे रेवेन्यू में, सारी पुलिस में, सारी ज्यूडिशियरी में, हर जगह उर्दू ही इस्तेमाल होती है । आप यह कहिए कि 70 साल से कोई गलती हुई है । यह 1889 में महाराजा प्रताप सिंह ने रखी है और उसके बाद महाराजा हरि सिंह ने 1939 के कॉन्स्टीट्यूशन में रखी है । उसके बाद 1957 के कॉन्स्टीट्यूशन में बेस हो गई । यह आज की बात नहीं है । किसी ने इंट्रोड्यूस किया, आप उनके किसी स्टेट के साथ लिंक करेंगे या किसी और एक रीजन के साथ । यह वहां से 1989 से हुई है ।

          दूसरी बात आप बताइए कि जब आप ऐसा कनफ्यूजन क्रिएट करेंगे कि ऑफिशियल लैंग्वेज का प्रयोग कोई भी करेगा । कैसे करेगा, किसमें करेगा, कौन जवाब देगा, कौन अधिकारी होगा, जो ऐसे वातावरण में इस कनफ्यूजन में वह फरफॉर्म करेगा । देखिए, आप कैसा कनफ्यूजन क्रिएट कर रहे हैं, आप मुझे मिसाल दे दीजिए कि किसी भी सूबे में, किसी भी प्रांत में, किसी भी रीजन में, यू.टी. कहिए, कुछ कहिए, क्या कहीं पाँच जबानें ऑफिशियल हैं । आप कहिए न । देखिए, बात यह है कि हमने पहले दिन से ही कहा कि 5 अगस्त के फैसले एक अग्रेशन के तौर पर है । इससे क्या है कि हमारी आइडेंटिटी, हमारी शिनाख्त पर आप सवाल लगा रहे हैं । उर्दू एक लिंक लैंग्वेज है । देखिए, यह जम्मू और कश्मीर के दरम्यान लिंक लैंग्वेज है, जम्मू और लद्दाख के दरम्यान लिंक लैंग्वेज है और कम्यूनिटीज के दरम्यान लिंक लैंग्वेज है । आप देखिए , यह इस वक्त एक रूप धारण कर चुकी है । इस वक्त आप कहीं पर भी जाइए, किसी भी हाउसहोल्ड में जाइए, हमारे जम्मू का निवासी हो, डोगरा हो, कश्मीरी हो, पीर पंचाल वाला हो, डोडा वाला हो, चिनाब वैली वाला हो, हर जगह आपको लगेगा कि उर्दू एक लिंक लैंग्वेज है, ऑफिशियल लैंग्वेज है, असेम्बली में और बाकी जगह पर इस्तेमाल होती है । अगर आपकी यह बात मानी जाए कि सिर्फ 0.16 परसेंट ही उर्दू बोलते हैं तो मुझे कहिएगा । फिर आपको आवश्यकता क्या है, आपको इसको रखने की जरूरत क्या है?

दूसरी बात यह है कि इस वक्त कौन सी इमरजेंसी है, लेफ्टिनेंट गवर्नर साहब ने कहा- Out of the five languages that you declare as the official languages, two of them are already there. या ऐसा होता, that no language or languages right now used as official language cannot be treated as official language or should be discontinued, फिर भी बात मानी जाती है । वे दो तो आप रख ही रहे हैं । If things are like that, what is the emergency to press into service Section 73? कौन सी जरूरत है? अगर उसको आप retrograde कर रहे हैं । आपके पास इसका क्या जवाब है? कनफ्यूजन क्रिएट करने का क्या जवाब है? आंकड़े कैसे हैं, 0.16 परसेंट क्या दलील देता है? 0.16 है, तो फिर ऑफिशियल क्यों कर रहे है? बात यह है कि pre-empt न हो जाए । सुप्रीम कोर्ट का जो भी डिसिजन हो, सुप्रीम कोर्ट का आदर हो, एक दूसरे इंस्टीट्यूशन का आदर हो । हमें चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करें । सुप्रीम कोर्ट के पास यह ऑप्शन था । The Supreme Court could have on the first day thrown out the petition and said: “No, this petition is not entertainable”.

आप देखिए कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली नजर में इसमें मेरिट पाया और इसे 5 जजेज की कांस्टीट्यूशनल बेंच के सुपुर्द किया । यहाँ पर बड़े वकील लोग बैठे हुए हैं, वे जानते हैं कि फॉर्मल ऐडमिशन का क्या मतलब होता है । All this is ill conceived. यह आना ही नहीं चाहिए था । यह आप उसी का तसलसुल कर रहे हैं । हम चाहते हैं कि दूरियाँ खत्म हों, हम चाहते हैं कि 5 अगस्त वाले फैसले को आप रिवोक करें ताकि अमन बरपा हो । आज की तारीख में भी जब हम यहाँ बात कर रहे हैं, एक-दो एनकाउन्टर कश्मीर में चल रहे हैं ।…(व्यवधान) एक-दो एनकाउन्टर आज चल रहे हैं । ये जो आप रोज-रोज एक ज़र्ब लगा रहे हैं, एक खंजर पैबस्त कर रहे हैं, यह ना कीजिएगा । अब आप उस जबान को भी रख रहे हैं, तीन और ला रहे हैं । पाँच जबान में आप कैसा कंफ्यूजन पैदा करेंगे? कौन काम करेगा? यहाँ के आईएएस अधिकारी हैं, वे डोगरी में जवाब देंगे, कश्मीरी में जवाब देंगे, अंग्रेजी में देंगे, उर्दू में देंगे या हिन्दी में जवाब देंगे? Why do they treat Kashmir differently in such a strange manner, when they have not introduced more than two languages? There are not more than two languages in any part of the country. यह कैसा इंतकाम हो रहा है? …(व्यवधान)

          जनाब, मेरी गुजारिश यह होगी कि यह हाउस इस कानून को बिल्कुल ही नामंजूर करे । इस वक्त इसकी आवश्यकता नहीं है ।

उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री; प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री; कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री; परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री तथा अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री (डॉ. जितेन्द्र सिंह): महोदय, नेशनल कांफ्रेंस के हमारे मित्र जो बात कर रहे थे, मैं बड़े तवज्जो के साथ सुन रहा था । Though I do not wish to say this, but the House has been grossly misled by what has been said. पहली बात तो यह है, मुझे हैरत इस बात की है कि आपको ऐतराज इस बात का है कि कश्मीरी को क्यों जबान के तौर पर मान्यता दी जा रही है, बल्कि आपको तो खुश होना चाहिए । आपने 60 साल सियासत की कश्मीरियत के नाम के ऊपर, कश्मीर केन्द्रित राजनीति करके और आज जब कश्मीर की भाषा को एक दर्जा दिया जा रहा है, एक मकाम दिया जा रहा है तो आपको उसके ऊपर ऐतराज है ।…(व्यवधान) माफ कीजिएगा, आपने पिछले 15 मिनट में जो बातें कही हैं, आपने खुद--खुद अपने अवाम के आगे अपने आपको बेनकाब कर दिया और मुख्तसर तौर पर हमारा यही हमेशा से मौकिफ़ रहा है, यही हमारा पक्ष रहा है कि जिस तरह से ये 10 परसेंट वोटर टर्न आउट के नेता वहाँ से मुंतख़ब होकर आए और अपनी प्रभुसत्ता बनाए रखने के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी, पुश्त दर पुश्त, तीन-तीन, चार-चार पीढ़ियों तक आपने कश्मीरी अवाम को ठगा और आज खुद--खुद आप बेनकाब हो गए कि आपको इस बात का ऐतराज है कि कश्मीरी को सरकारी जबान का दर्जा दिया जाए ।

          दूसरी बात, क्योंकि हमें लंबा नहीं बोलना है, यह बिल अब पास होने ही वाला है, यह आपके वश की बात है, किसी और के, लेकिन कानूनसाज होने के बाद भी आपने यह कह दिया कि जो बिल 5 और 6 अगस्त को पारित हुआ था, वह गैर कानूनी था । हमने तो आप ही से यह सीखा, आप जैसे कानूनसाजों से सीखा that Parliament is supreme. The hon. Member is actually defying and challenging the verdict of the Parliament, the supreme democratic institution of the country. दोनों सदनों ने इसे पारित किया है । आप इस तरह से कहते हैं तो हमें ताज्जुब होता है । इसका मतलब है कि कुछ एक लोगों की ज़हनियत में यह बात घुस गई थी कि निरन्तरता के साथ झूठ बोला जाए, ठगा जाए । You can fool some people for some time, but you cannot fool all the people for all the time. Time has now expired for that phenomena of fooling all the people all the time.

20.00 hrs

आपने ऑटोनोमी की बात की, आपने सेल्फ रूल की बात की । ऑटोनोमी का मतलब क्या है, सेल्फ रूल की मुराद क्या है, यह हमें पहली बार मोदी जी ने सिखाया, वहां पर पंचायतों के चुनाव कराकर । आपने पंचायती राज व्यवस्था नहीं होने दी और जब पंचायतों का चुनाव होता है तो आप उसका बहिष्कार करते हैं, what kind of self-autonomy and self-rule are you talking of? हमें तो यह सिखाया गया कि जम्हूरियत में सेल्फ रूल का मतलब, स्वायत्तता का मतलब, ऑटोनोमी का मतलब यह है कि उसका जन्म ग्रासरूट से होता है । If it is not the autonomy of the grassroots and if it is not the rule of the grassroots, then whose self-rule and whose self-autonomy is that? It only means autonomy of the self, rule of the self, rule of the family and rule of the dynasty. इसलिए यह जो हो रहा है, I can say with all the confidence at my command that the common man in the streets of Srinagar is rejoicing. He is aspirational. वह अब देख रहा है कि जिस तरह से मोदी जी के नेतृत्व में, उनकी कयादत में, हिन्दुस्तान भर के नौजवानों के लिए अनेक नए मौके खुल चुके हैं, जिससे वह अपने आपको वंचित नहीं रखना चाहता, अपने आपको महरूम नहीं रखना चाहता । इसलिए आपसे गुजारिश है । आप बड़े दानिशवर हैं, बुद्धिजीवी भी हैं कि आप आवाम की आवाज को समझिए । वहां पर जो फिजा बदली है, उस बदली हुई फिजा को जितनी जल्दी आप समझेंगे, हम समझेंगे, उसमें ही जम्मू एवं कश्मीर का भला है, हिन्दुस्तान का भला है । जो आप कह रहे हैं, आपकी पार्टी के जो दूसरे नेता हैं, it may be music to their ears, लेकिन जम्मू एवं कश्मीर के लोगों के लिए यह बात तरजुबानी नहीं करती । आप बड़े बुद्धिजीवी हैं । आपने बड़े शायराना अंदाज में अपनी बात रखी । मैं आपको गालिब का एक शेर याद करवा दूं: -

सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या,

कहती है तुझ को ख़ल्क़--ख़ुदा ग़ाएबाना क्या ।

महोदय, यही कहकर मुझे अपनी बात खत्म करनी है क्योंकि इस वक्त सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि यह बिल पास हो और उसके लिए हम ताली बजाएं ।…(व्यवधान)

श्री पिनाकी मिश्रा (पुरी): सर, अभी दूसरे मेम्बर्स यहां नहीं हैं, इसलिए मैं उनकी तरफ से एक बात पूछता हूं । अभी माननीय मंत्री जी सेन्सस की फिगर्स दे रहे थे ।

          अध्यक्ष जी, आपको याद होगा, यहां हाउस में, जीरो आवर में कई मेम्बर्स, जैसे सुखबीर बादल जी, कांग्रेस की तरफ से भी कई मेम्बर्स और फारुख साहब ने भी एक गुजारिश की थी कि आप पंजाबी भाषा को भी इसमें इन्क्लूड कीजिए । माननीय मंत्री जी अभी आंकड़े बता रहे थे, तो जरा उनके भी नम्बर्स पता चल जाएं, ताकि उनकी भी ख्वाहिश पूरी हो जाए कि उनकी बात किसी ने इस हाउस में रख दी है ।

माननीय अध्यक्ष: सही बात है ।

श्री जी. किशन रेड्डी: अध्यक्ष जी, यहां यह मूल सवाल उठाया गया कि आपको यह बिल लाने का क्या अधिकार है? इस समय केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर का लेजिस्लेचर मौजूद नहीं है तथा जम्मू-कश्मीर का रिकग्निशन एक्ट, 2019 की धारा 73 के अनुसार दिनांक 31.10.2019 के एस.. नं. 3937(E) के तहत नोटिफाइड प्रोक्लेमेशन लागू है । उक्त प्रोक्लेमेशन के पैरा 4 के अनुसार यूनियन टेरीटरी ऑफ जम्मू-कश्मीर के लेजिस्लेचर पावर्स, पार्लियामेंट के द्वारा अथवा उसकी अथॉरिटी के अन्तर्गत प्रयोग किए जा सकते हैं ।

          महोदय, दूसरा सवाल यह उठाया गया कि यहां पाँच भाषाएँ क्यों की जाएं? अभी पुदुचेरी है । वह भी यू.टी. है । पुदुचेरी में भी पाँच ऑफिसियल लैंग्वेजेज हैं । वहां फ्रेंच है, अंग्रेजी है, तमिल है, मलयालम है और तेलुगू भी है । वह बहुत छोटा केन्द्रशासित प्रदेश है । वह जम्मू-कश्मीर से बहुत ही छोटा है और जब वहां पाँच लैंग्वेजेज हो सकते हैं तो जम्मू-कश्मीर में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है?

          महोदय, मैं कश्मीर वैली के गांवों में घूमा हूं । कश्मीर के हर घर में लोग कश्मीरी बोलते हैं और कश्मीरी में लिखते हैं । इसलिए इसकी कोई समस्या नहीं है ।

          महोदय, पिनाकी जी ने भी कुछ पूछा है । इस प्रस्ताव के द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए खास प्रावधान रखे गए हैं ।

          महोदय, इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए कुछ इंस्टीट्यूशनल स्ट्रक्चर्स का काम किया गया है, जैसे जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति तथा भाषाओं के अकादमी को और मजबूत करने का प्रयास किया गया है । इन संस्थाओं के द्वारा पंजाबी, गूजरी और पहाड़ी इन तीन भाषाओं का विकास करने के लिए और विशेष कदम उठाने के लिए इस प्रस्ताव के द्वारा प्रावधान सम्मिलित किया जा रहा है ।

          महोदय, पंजाबी, गूजरी और पहाड़ी भाषा के विकास के लिए कोई भी कमी नहीं होगी । इस बिल के द्वारा तीन भाषाओं को प्रोत्साहित करना, पूरा प्रावधान देना, खासकर पंजाबी भाषा बोलने वाली जनता 1.78 परसेंट है । वे जम्मू-कश्मीर में रहते हैं । उनके लिए पंजाबी भाषा को प्राथमिकता देते हुए, उनको प्रोत्साहित करने के लिए साहित्य समृद्धि और पृष्ठभूमि का भी प्रावधान शामिल किया गया है । पंजाबी भाषा के लिए कोई भी कमी नहीं होगी । न्यू एजूकेशन पॉलिसी के तहत छात्राओं को कक्षा पाँच तक अपनी मातृभाषा में विषयों को सीखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं । हमारी सरकार किसी भी क्षेत्रीय भाषा के विरूद्ध नहीं है ।  इस बिल में 70 परसेंट लोगों की बोलने वाली भाषा कश्मीरी और डोगरी को प्राथमिकता दी गई है ।

          महोदय, उर्दू और इंग्लिश के साथ-साथ कश्मीरी, डोगरी और हिन्दी भाषा को यूनियन टेरिटरी जम्मू एंड कश्मीर के ऑफिशियल पर्पस की भाषाओं के रूप में स्वीकार किया जाना अपेक्षित है । इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मैं सभी माननीय सांसदों से अनुरोध करता हूँ कि जम्मू एंड कश्मीर ऑफिशियल लैंग्वेजेज बिल, 2020 को पूरी तरह से पारित किया जाए ।

माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:

“That the Bill to provide for the languages to be used for the official purposes of the Union territory of Jammu and Kashmir and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration.”

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।

माननीय अध्यक्ष : अब सभा विधेयक पर खंडवार विचार करेगी ।

खंड 2 से 4

माननीय अध्यक्ष : प्रश्न यह है :

                   कि खंड 2 से 4 विधेयक का अंग बनें ।

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।

खंड 2 से 4 विधेयक में जोड़ दिए गए ।

खंड 1, अधिनियमन सूत्र और विधेयक का पूरा नाम विधेयक में जोड़ दिए गए ।

माननीय अध्यक्ष: मंत्री जी, अब प्रस्ताव करें कि राज्य सभा द्वारा यथापारित विधेयक को पारित किया जाए ।

SHRI G. KISHAN REDDY: I beg to move:

“That the Bill be passed”.

माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:

कि विधेयक को पारित किया जाए ।

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।

___________

20.08 hrs

ANNOUNCEMENT BY THE SPEAKER

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, मुझे सभा को सूचित करना है कि कल सभा की कार्यवाही शाम को छह बजे से प्रारंभ होगी । इसके बारे में केवल माननीय सदस्यों को सूचना देना चाहता हूँ ।

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Title: Discussion on the motion for consideration of the Jammu and Kashmir Official Languages Bill, 2020 (Bill Passed).

माननीय अध्यक्ष : आइटम नम्बर 19.

SHRI G. KISHAN REDDY: I beg to move:

“That the Bill to provide for the languages to be used for the official purposes of the Union territory of Jammu and Kashmir and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration.”

माननीय अध्यक्ष : प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ :

“That the Bill to provide for the languages to be used for the official purposes of the Union territory of Jammu and Kashmir and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration.”

 

श्री हसनैन मसूदी (अनन्तनाग): जनाब, मैं पूरी बात कहूँगा । पहले मैंने गुजारिश की कि यह कानून, लेजिस्लेटिव कम्पीटेंस नहीं है । अब कानून पर जाइए । देखिए, क्या कहीं पर ऐसा कोई कनफ्यूजन है, मुल्क के किसी भी रीजन में इंट्रोड्यूस किया गया, जहां पर पाँच जबानें इकट्ठी तौर पर लगाई गईं । जनाब देखिए, कश्मीरी और डोगरी, डोंगरी नहीं है, डोगरी है, मंत्री जी को शायद अपना तलाफ्फुस ठीक करना होगा । डोगरी पहले ही 8th शेड्यूल का हिस्सा है । इनका कहना है कि 0.16 परसेंट सिर्फ उर्दू बोलते हैं । आप मंत्री जी से पूछिएगा कि फिर उर्दू को सरकारी जबान रखने की आपको क्यों जरूरत पड़ती है? अगर आपकी ही बात मानी जाए, सदन को जो भी कहा जाए, अगर आप कहते हैं कि 0.16 परसेंट है, लेकिन यह फैक्ट नहीं है । This is a misstatement of fact. उर्दू   इस वक्त सारे रेवेन्यू में, सारी पुलिस में, सारी ज्यूडिशियरी में, हर जगह उर्दू ही इस्तेमाल होती है । आप यह कहिए कि 70 साल से कोई गलती हुई है । यह 1889 में महाराजा प्रताप सिंह ने रखी है और उसके बाद महाराजा हरि सिंह ने 1939 के कॉन्स्टीट्यूशन में रखी है । उसके बाद 1957 के कॉन्स्टीट्यूशन में बेस हो गई । यह आज की बात नहीं है । किसी ने इंट्रोड्यूस किया, आप उनके किसी स्टेट के साथ लिंक करेंगे या किसी और एक रीजन के साथ । यह वहां से 1989 से हुई है ।

          दूसरी बात आप बताइए कि जब आप ऐसा कनफ्यूजन क्रिएट करेंगे कि ऑफिशियल लैंग्वेज का प्रयोग कोई भी करेगा । कैसे करेगा, किसमें करेगा, कौन जवाब देगा, कौन अधिकारी होगा, जो ऐसे वातावरण में इस कनफ्यूजन में वह फरफॉर्म करेगा । देखिए, आप कैसा कनफ्यूजन क्रिएट कर रहे हैं, आप मुझे मिसाल दे दीजिए कि किसी भी सूबे में, किसी भी प्रांत में, किसी भी रीजन में, यू.टी. कहिए, कुछ कहिए, क्या कहीं पाँच जबानें ऑफिशियल हैं । आप कहिए न । देखिए, बात यह है कि हमने पहले दिन से ही कहा कि 5 अगस्त के फैसले एक अग्रेशन के तौर पर है । इससे क्या है कि हमारी आइडेंटिटी, हमारी शिनाख्त पर आप सवाल लगा रहे हैं । उर्दू एक लिंक लैंग्वेज है । देखिए, यह जम्मू और कश्मीर के दरम्यान लिंक लैंग्वेज है, जम्मू और लद्दाख के दरम्यान लिंक लैंग्वेज है और कम्यूनिटीज के दरम्यान लिंक लैंग्वेज है । आप देखिए , यह इस वक्त एक रूप धारण कर चुकी है । इस वक्त आप कहीं पर भी जाइए, किसी भी हाउसहोल्ड में जाइए, हमारे जम्मू का निवासी हो, डोगरा हो, कश्मीरी हो, पीर पंचाल वाला हो, डोडा वाला हो, चिनाब वैली वाला हो, हर जगह आपको लगेगा कि उर्दू एक लिंक लैंग्वेज है, ऑफिशियल लैंग्वेज है, असेम्बली में और बाकी जगह पर इस्तेमाल होती है । अगर आपकी यह बात मानी जाए कि सिर्फ 0.16 परसेंट ही उर्दू बोलते हैं तो मुझे कहिएगा । फिर आपको आवश्यकता क्या है, आपको इसको रखने की जरूरत क्या है?

दूसरी बात यह है कि इस वक्त कौन सी इमरजेंसी है, लेफ्टिनेंट गवर्नर साहब ने कहा- Out of the five languages that you declare as the official languages, two of them are already there. या ऐसा होता, that no language or languages right now used as official language cannot be treated as official language or should be discontinued, फिर भी बात मानी जाती है । वे दो तो आप रख ही रहे हैं । If things are like that, what is the emergency to press into service Section 73? कौन सी जरूरत है? अगर उसको आप retrograde कर रहे हैं । आपके पास इसका क्या जवाब है? कनफ्यूजन क्रिएट करने का क्या जवाब है? आंकड़े कैसे हैं, 0.16 परसेंट क्या दलील देता है? 0.16 है, तो फिर ऑफिशियल क्यों कर रहे है? बात यह है कि pre-empt न हो जाए । सुप्रीम कोर्ट का जो भी डिसिजन हो, सुप्रीम कोर्ट का आदर हो, एक दूसरे इंस्टीट्यूशन का आदर हो । हमें चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करें । सुप्रीम कोर्ट के पास यह ऑप्शन था । The Supreme Court could have on the first day thrown out the petition and said: “No, this petition is not entertainable”.

आप देखिए कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली नजर में इसमें मेरिट पाया और इसे 5 जजेज की कांस्टीट्यूशनल बेंच के सुपुर्द किया । यहाँ पर बड़े वकील लोग बैठे हुए हैं, वे जानते हैं कि फॉर्मल ऐडमिशन का क्या मतलब होता है । All this is ill conceived. यह आना ही नहीं चाहिए था । यह आप उसी का तसलसुल कर रहे हैं । हम चाहते हैं कि दूरियाँ खत्म हों, हम चाहते हैं कि 5 अगस्त वाले फैसले को आप रिवोक करें ताकि अमन बरपा हो । आज की तारीख में भी जब हम यहाँ बात कर रहे हैं, एक-दो एनकाउन्टर कश्मीर में चल रहे हैं ।…(व्यवधान) एक-दो एनकाउन्टर आज चल रहे हैं । ये जो आप रोज-रोज एक ज़र्ब लगा रहे हैं, एक खंजर पैबस्त कर रहे हैं, यह ना कीजिएगा । अब आप उस जबान को भी रख रहे हैं, तीन और ला रहे हैं । पाँच जबान में आप कैसा कंफ्यूजन पैदा करेंगे? कौन काम करेगा? यहाँ के आईएएस अधिकारी हैं, वे डोगरी में जवाब देंगे, कश्मीरी में जवाब देंगे, अंग्रेजी में देंगे, उर्दू में देंगे या हिन्दी में जवाब देंगे? Why do they treat Kashmir differently in such a strange manner, when they have not introduced more than two languages? There are not more than two languages in any part of the country. यह कैसा इंतकाम हो रहा है? …(व्यवधान)

          जनाब, मेरी गुजारिश यह होगी कि यह हाउस इस कानून को बिल्कुल ही नामंजूर करे । इस वक्त इसकी आवश्यकता नहीं है ।

उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री; प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री; कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री; परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री तथा अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री (डॉ. जितेन्द्र सिंह): महोदय, नेशनल कांफ्रेंस के हमारे मित्र जो बात कर रहे थे, मैं बड़े तवज्जो के साथ सुन रहा था । Though I do not wish to say this, but the House has been grossly misled by what has been said. पहली बात तो यह है, मुझे हैरत इस बात की है कि आपको ऐतराज इस बात का है कि कश्मीरी को क्यों जबान के तौर पर मान्यता दी जा रही है, बल्कि आपको तो खुश होना चाहिए । आपने 60 साल सियासत की कश्मीरियत के नाम के ऊपर, कश्मीर केन्द्रित राजनीति करके और आज जब कश्मीर की भाषा को एक दर्जा दिया जा रहा है, एक मकाम दिया जा रहा है तो आपको उसके ऊपर ऐतराज है ।…(व्यवधान) माफ कीजिएगा, आपने पिछले 15 मिनट में जो बातें कही हैं, आपने खुद--खुद अपने अवाम के आगे अपने आपको बेनकाब कर दिया और मुख्तसर तौर पर हमारा यही हमेशा से मौकिफ़ रहा है, यही हमारा पक्ष रहा है कि जिस तरह से ये 10 परसेंट वोटर टर्न आउट के नेता वहाँ से मुंतख़ब होकर आए और अपनी प्रभुसत्ता बनाए रखने के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी, पुश्त दर पुश्त, तीन-तीन, चार-चार पीढ़ियों तक आपने कश्मीरी अवाम को ठगा और आज खुद--खुद आप बेनकाब हो गए कि आपको इस बात का ऐतराज है कि कश्मीरी को सरकारी जबान का दर्जा दिया जाए ।

          दूसरी बात, क्योंकि हमें लंबा नहीं बोलना है, यह बिल अब पास होने ही वाला है, यह आपके वश की बात है, किसी और के, लेकिन कानूनसाज होने के बाद भी आपने यह कह दिया कि जो बिल 5 और 6 अगस्त को पारित हुआ था, वह गैर कानूनी था । हमने तो आप ही से यह सीखा, आप जैसे कानूनसाजों से सीखा that Parliament is supreme. The hon. Member is actually defying and challenging the verdict of the Parliament, the supreme democratic institution of the country. दोनों सदनों ने इसे पारित किया है । आप इस तरह से कहते हैं तो हमें ताज्जुब होता है । इसका मतलब है कि कुछ एक लोगों की ज़हनियत में यह बात घुस गई थी कि निरन्तरता के साथ झूठ बोला जाए, ठगा जाए । You can fool some people for some time, but you cannot fool all the people for all the time. Time has now expired for that phenomena of fooling all the people all the time.

20.00 hrs

आपने ऑटोनोमी की बात की, आपने सेल्फ रूल की बात की । ऑटोनोमी का मतलब क्या है, सेल्फ रूल की मुराद क्या है, यह हमें पहली बार मोदी जी ने सिखाया, वहां पर पंचायतों के चुनाव कराकर । आपने पंचायती राज व्यवस्था नहीं होने दी और जब पंचायतों का चुनाव होता है तो आप उसका बहिष्कार करते हैं, what kind of self-autonomy and self-rule are you talking of? हमें तो यह सिखाया गया कि जम्हूरियत में सेल्फ रूल का मतलब, स्वायत्तता का मतलब, ऑटोनोमी का मतलब यह है कि उसका जन्म ग्रासरूट से होता है । If it is not the autonomy of the grassroots and if it is not the rule of the grassroots, then whose self-rule and whose self-autonomy is that? It only means autonomy of the self, rule of the self, rule of the family and rule of the dynasty. इसलिए यह जो हो रहा है, I can say with all the confidence at my command that the common man in the streets of Srinagar is rejoicing. He is aspirational. वह अब देख रहा है कि जिस तरह से मोदी जी के नेतृत्व में, उनकी कयादत में, हिन्दुस्तान भर के नौजवानों के लिए अनेक नए मौके खुल चुके हैं, जिससे वह अपने आपको वंचित नहीं रखना चाहता, अपने आपको महरूम नहीं रखना चाहता । इसलिए आपसे गुजारिश है । आप बड़े दानिशवर हैं, बुद्धिजीवी भी हैं कि आप आवाम की आवाज को समझिए । वहां पर जो फिजा बदली है, उस बदली हुई फिजा को जितनी जल्दी आप समझेंगे, हम समझेंगे, उसमें ही जम्मू एवं कश्मीर का भला है, हिन्दुस्तान का भला है । जो आप कह रहे हैं, आपकी पार्टी के जो दूसरे नेता हैं, it may be music to their ears, लेकिन जम्मू एवं कश्मीर के लोगों के लिए यह बात तरजुबानी नहीं करती । आप बड़े बुद्धिजीवी हैं । आपने बड़े शायराना अंदाज में अपनी बात रखी । मैं आपको गालिब का एक शेर याद करवा दूं: -

सुन तो सही जहाँ में है तेरा फ़साना क्या,

कहती है तुझ को ख़ल्क़--ख़ुदा ग़ाएबाना क्या ।

महोदय, यही कहकर मुझे अपनी बात खत्म करनी है क्योंकि इस वक्त सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि यह बिल पास हो और उसके लिए हम ताली बजाएं ।…(व्यवधान)

श्री पिनाकी मिश्रा (पुरी): सर, अभी दूसरे मेम्बर्स यहां नहीं हैं, इसलिए मैं उनकी तरफ से एक बात पूछता हूं । अभी माननीय मंत्री जी सेन्सस की फिगर्स दे रहे थे ।

          अध्यक्ष जी, आपको याद होगा, यहां हाउस में, जीरो आवर में कई मेम्बर्स, जैसे सुखबीर बादल जी, कांग्रेस की तरफ से भी कई मेम्बर्स और फारुख साहब ने भी एक गुजारिश की थी कि आप पंजाबी भाषा को भी इसमें इन्क्लूड कीजिए । माननीय मंत्री जी अभी आंकड़े बता रहे थे, तो जरा उनके भी नम्बर्स पता चल जाएं, ताकि उनकी भी ख्वाहिश पूरी हो जाए कि उनकी बात किसी ने इस हाउस में रख दी है ।

माननीय अध्यक्ष: सही बात है ।

श्री जी. किशन रेड्डी: अध्यक्ष जी, यहां यह मूल सवाल उठाया गया कि आपको यह बिल लाने का क्या अधिकार है? इस समय केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर का लेजिस्लेचर मौजूद नहीं है तथा जम्मू-कश्मीर का रिकग्निशन एक्ट, 2019 की धारा 73 के अनुसार दिनांक 31.10.2019 के एस.. नं. 3937(E) के तहत नोटिफाइड प्रोक्लेमेशन लागू है । उक्त प्रोक्लेमेशन के पैरा 4 के अनुसार यूनियन टेरीटरी ऑफ जम्मू-कश्मीर के लेजिस्लेचर पावर्स, पार्लियामेंट के द्वारा अथवा उसकी अथॉरिटी के अन्तर्गत प्रयोग किए जा सकते हैं ।

          महोदय, दूसरा सवाल यह उठाया गया कि यहां पाँच भाषाएँ क्यों की जाएं? अभी पुदुचेरी है । वह भी यू.टी. है । पुदुचेरी में भी पाँच ऑफिसियल लैंग्वेजेज हैं । वहां फ्रेंच है, अंग्रेजी है, तमिल है, मलयालम है और तेलुगू भी है । वह बहुत छोटा केन्द्रशासित प्रदेश है । वह जम्मू-कश्मीर से बहुत ही छोटा है और जब वहां पाँच लैंग्वेजेज हो सकते हैं तो जम्मू-कश्मीर में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है?

          महोदय, मैं कश्मीर वैली के गांवों में घूमा हूं । कश्मीर के हर घर में लोग कश्मीरी बोलते हैं और कश्मीरी में लिखते हैं । इसलिए इसकी कोई समस्या नहीं है ।

          महोदय, पिनाकी जी ने भी कुछ पूछा है । इस प्रस्ताव के द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए खास प्रावधान रखे गए हैं ।

          महोदय, इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए कुछ इंस्टीट्यूशनल स्ट्रक्चर्स का काम किया गया है, जैसे जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति तथा भाषाओं के अकादमी को और मजबूत करने का प्रयास किया गया है । इन संस्थाओं के द्वारा पंजाबी, गूजरी और पहाड़ी इन तीन भाषाओं का विकास करने के लिए और विशेष कदम उठाने के लिए इस प्रस्ताव के द्वारा प्रावधान सम्मिलित किया जा रहा है ।

          महोदय, पंजाबी, गूजरी और पहाड़ी भाषा के विकास के लिए कोई भी कमी नहीं होगी । इस बिल के द्वारा तीन भाषाओं को प्रोत्साहित करना, पूरा प्रावधान देना, खासकर पंजाबी भाषा बोलने वाली जनता 1.78 परसेंट है । वे जम्मू-कश्मीर में रहते हैं । उनके लिए पंजाबी भाषा को प्राथमिकता देते हुए, उनको प्रोत्साहित करने के लिए साहित्य समृद्धि और पृष्ठभूमि का भी प्रावधान शामिल किया गया है । पंजाबी भाषा के लिए कोई भी कमी नहीं होगी । न्यू एजूकेशन पॉलिसी के तहत छात्राओं को कक्षा पाँच तक अपनी मातृभाषा में विषयों को सीखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं । हमारी सरकार किसी भी क्षेत्रीय भाषा के विरूद्ध नहीं है ।  इस बिल में 70 परसेंट लोगों की बोलने वाली भाषा कश्मीरी और डोगरी को प्राथमिकता दी गई है ।

          महोदय, उर्दू और इंग्लिश के साथ-साथ कश्मीरी, डोगरी और हिन्दी भाषा को यूनियन टेरिटरी जम्मू एंड कश्मीर के ऑफिशियल पर्पस की भाषाओं के रूप में स्वीकार किया जाना अपेक्षित है । इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मैं सभी माननीय सांसदों से अनुरोध करता हूँ कि जम्मू एंड कश्मीर ऑफिशियल लैंग्वेजेज बिल, 2020 को पूरी तरह से पारित किया जाए ।

माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:

“That the Bill to provide for the languages to be used for the official purposes of the Union territory of Jammu and Kashmir and for matters connected therewith or incidental thereto, be taken into consideration.”

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।

माननीय अध्यक्ष : अब सभा विधेयक पर खंडवार विचार करेगी ।

खंड 2 से 4

माननीय अध्यक्ष : प्रश्न यह है :

                   कि खंड 2 से 4 विधेयक का अंग बनें ।

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।

खंड 2 से 4 विधेयक में जोड़ दिए गए ।

खंड 1, अधिनियमन सूत्र और विधेयक का पूरा नाम विधेयक में जोड़ दिए गए ।

माननीय अध्यक्ष: मंत्री जी, अब प्रस्ताव करें कि राज्य सभा द्वारा यथापारित विधेयक को पारित किया जाए ।

SHRI G. KISHAN REDDY: I beg to move:

“That the Bill be passed”.

माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:

कि विधेयक को पारित किया जाए ।

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।

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20.08 hrs

ANNOUNCEMENT BY THE SPEAKER

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, मुझे सभा को सूचित करना है कि कल सभा की कार्यवाही शाम को छह बजे से प्रारंभ होगी । इसके बारे में केवल माननीय सदस्यों को सूचना देना चाहता हूँ ।

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