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Seventeenth Loksabha

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Title: Introduction of the Essential Commodities (Amendment) Bill, 2020.

     

 

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री दानवे रावसाहेब दादाराव): अध्यक्ष महोदय, श्री राम विलास पासवान की ओर से, मैं प्रस्ताव करता हूं कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का और संशोधन करने वाले विधेयक को पुर:स्थापित करने की अनुमति दी जाए ।

माननीय अध्यक्ष: अधीर रंजन चौधरी जी, क्या आप कुछ बोलना चाहते हैं?

 

श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): सर, बात यह है कि इसमें कोई स्टेटमेंट नहीं है । सबसे बड़ी गलती यह है कि यहां जो बिल रखा जा रहा है, इसमें कोई स्टेटमेंट नहीं है ।

जो अलग से दो बिल आने वाले हैं, उनकी स्टेटमेंट है, लेकिन इस बिल की कोई स्टेटमेंट नहीं हैं । इसके साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि कृषि उत्पाद, खाने की चीजें, फल-फूल, सब्जियों की स्टाक लिमिट पूरी तरह से हटाकर इस विधेयक से किसानों का बहुत नुकसान होगा और उपभोक्ताओं को भी बहुत नुकसान होगा । इस विधेयक से कालाबाजारी, जमाखोरी और कुछ मुट्ठीभर पूंजीपतियों का इससे फायदा होगा । मैं याद दिलाता हूं कि वर्ष 2015 में दाल की खरीद-फरोख्त में इस तरह का घोटाला हुआ था । वर्ष 2015 में ढाई लाख करोड़ रुपये का दाल घोटाला इस बात का जीता-जागता सबूत है, जहां 45 रुपये किलो दाल आयात करके 200 रुपये किलो तक दाल बेची गई थी ।

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, जब बिल पर डिटेल में चर्चा होगी, तब आप बोलिएगा ।

श्री अधीर रंजन चौधरी: महोदय, यह हमारे कोओपरेटिव फैड्रेलिज्म पर एक प्रहार है क्योंकि there could also be some States where the business of hoarding is so rampant that the State Governments may wish to regulate and place stock limits.  Hence, respecting the principle of federalism, the amendment must apply only if the State Government by notification applies that amendment in its State. हमारे संघीय ढांचे में जिस तरह से यह बिल पेश किया जा रहा है, मैं उसका विरोध करता हूं । 

 

SHRI GAURAV GOGOI (KALIABOR): Thank you, hon. Speaker, Sir.  First, with regard to the legislative competence of the Bill, the Essential Commodities Act, the State Government could regulate the prices by fixing them in a situation of price rise.  This Bill deregulates certain commodities thus depriving the State Governments of this control.  This deprivation of this essential responsibility comes without any consultation with States.  This impingement on State powers without any consultation renders the Bill ultra vires. 

       Secondly, Sir, this Bill is extremely subjective.  The Bill does not define extraordinary circumstances under which the Government may regulate.  It also does not define the two situations of 100 per cent increase in retail price of horticulture produce and 50 per cent increase in retail price of non-perishable agricultural food when its stock price may be imposed. 

This creates room for arbitrary and subjective interpretation.  Additionally, the lack of stock limit allows corporates and traders with capacity and resources to hoard the commodities.  Hoarding of these commodities will allow them to manipulate the market.  Shortage of supply created by such hoarding will have two adverse consequences.  Firstly, it will cause the prices to exorbitantly increase. 

       Therefore, I request that this Bill should not be introduced. 

PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): Sir, under Rule 72(1), I oppose the introduction of the Essential Commodities (Amendment) Bill, 2020.  I have given a Statutory Resolution against the Ordinance which will be taken up later.

       Sir, I want to mention that this is an example of coercive federalism by the Central Government. जबरदस्ती स्टेट से पावर ली जाती है । Before, Sir, the States had the power to regulate stocks being kept by people.  It was necessary for avoiding hoarding and black-marketing or seasonal shortages during floods or droughts.  This power was wholly with the State Government.

 Now, this power is being taken over by the Central Government and the powers of the State Governments to regulate have been circumscribed.  The power to fix stock limits has been rendered illusory.  Through a provision and an explanation clause, the Ordinance has rendered the concept of stock limit illusory and meaningless.  If the Ordinance becomes an Act, hoarders will celebrate.  This is to help the hoarders.  

माननीय अध्यक्ष : मंत्री जी, क्या आप इस बिल के बारे में कुछ बोलना चाहते हैं?

श्री दानवे रावसाहेब दादाराव : अध्यक्ष जी, जब इस बिल की चर्चा होगी, तब सरकार की तरफ से सारे प्रश्नों के उत्तर दिए जाएंगे । लेकिन मैं आपके माध्यम से सम्मानीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि यह आर्डिनेंस 5 जून, 2020 को लाया गया । उस समय पूरे देश में महामारी थी और लॉकडाउन   घोषित था । उस समय किसानों की फसलें कटी हुई थीं, लेकिन कोई खरीदार नहीं था । व्यापारियों द्वारा माल उठाने में दिक्कतें थीं ।

 

 

12.00 hrs

       दूसरी ओर उसकी मांग बढ़ रही थी । इसलिए किसानों को केन्द्र बिन्दु मान कर यह ऑर्डिनैंस लाया गया था । इन परिस्थितियों में यह आवश्यक था कि किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर प्रदान हो और कंज्यूमर्स को आवश्यक वस्तुएं आसानी से मिले । इसलिए यह ऑर्डिनैंस लाया गया था ।

       अध्यक्ष महोदय, अभी माननीय सदस्य ने कहा है कि इस ऑर्डिनैंस के लिए राज्यों के विचार नहीं लिए गए हैं । मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को सूचित करना चाहता हूं कि यह ऑर्डिनैंस लाने से पहले राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक हाई पावर कमेटी बनाई गई थी और उस कमेटी में पंजाब, ओडिशा, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे । उन मुख्यमंत्रियों ने इस समिति के सभी बिन्दुओं पर चर्चा करने के बाद निर्णय किया है कि यह बिल आना चाहिए । मुझे ऐसा लगता है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस बिल के कारण किसानों पर कोई अन्याय भी नहीं होगा ।

माननीय अध्यक्ष : प्रश्न यह है :

कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का और संशोधन करने वाले विधेयक को पुर:स्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाए । 

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।

श्री दानवे रावसाहेब दादाराव: अध्यक्ष महोदय, मैं विधेयक को पुर:स्थापित करता हूं । …(व्यवधान)

 

_________

श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): सर, कोई स्टेटमेंट नहीं ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : वह विषय मेरे ध्यान में गया है । मैं उसे देखूंगा ।

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आइटम नम्बर 12. डॉ. हर्ष वर्धन जी ।

 

12.01 hrs

 

 

 

 

 

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Title: Introduction of the Essential Commodities (Amendment) Bill, 2020.

     

 

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री दानवे रावसाहेब दादाराव): अध्यक्ष महोदय, श्री राम विलास पासवान की ओर से, मैं प्रस्ताव करता हूं कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का और संशोधन करने वाले विधेयक को पुर:स्थापित करने की अनुमति दी जाए ।

माननीय अध्यक्ष: अधीर रंजन चौधरी जी, क्या आप कुछ बोलना चाहते हैं?

 

श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): सर, बात यह है कि इसमें कोई स्टेटमेंट नहीं है । सबसे बड़ी गलती यह है कि यहां जो बिल रखा जा रहा है, इसमें कोई स्टेटमेंट नहीं है ।

जो अलग से दो बिल आने वाले हैं, उनकी स्टेटमेंट है, लेकिन इस बिल की कोई स्टेटमेंट नहीं हैं । इसके साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि कृषि उत्पाद, खाने की चीजें, फल-फूल, सब्जियों की स्टाक लिमिट पूरी तरह से हटाकर इस विधेयक से किसानों का बहुत नुकसान होगा और उपभोक्ताओं को भी बहुत नुकसान होगा । इस विधेयक से कालाबाजारी, जमाखोरी और कुछ मुट्ठीभर पूंजीपतियों का इससे फायदा होगा । मैं याद दिलाता हूं कि वर्ष 2015 में दाल की खरीद-फरोख्त में इस तरह का घोटाला हुआ था । वर्ष 2015 में ढाई लाख करोड़ रुपये का दाल घोटाला इस बात का जीता-जागता सबूत है, जहां 45 रुपये किलो दाल आयात करके 200 रुपये किलो तक दाल बेची गई थी ।

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, जब बिल पर डिटेल में चर्चा होगी, तब आप बोलिएगा ।

श्री अधीर रंजन चौधरी: महोदय, यह हमारे कोओपरेटिव फैड्रेलिज्म पर एक प्रहार है क्योंकि there could also be some States where the business of hoarding is so rampant that the State Governments may wish to regulate and place stock limits.  Hence, respecting the principle of federalism, the amendment must apply only if the State Government by notification applies that amendment in its State. हमारे संघीय ढांचे में जिस तरह से यह बिल पेश किया जा रहा है, मैं उसका विरोध करता हूं । 

 

SHRI GAURAV GOGOI (KALIABOR): Thank you, hon. Speaker, Sir.  First, with regard to the legislative competence of the Bill, the Essential Commodities Act, the State Government could regulate the prices by fixing them in a situation of price rise.  This Bill deregulates certain commodities thus depriving the State Governments of this control.  This deprivation of this essential responsibility comes without any consultation with States.  This impingement on State powers without any consultation renders the Bill ultra vires. 

       Secondly, Sir, this Bill is extremely subjective.  The Bill does not define extraordinary circumstances under which the Government may regulate.  It also does not define the two situations of 100 per cent increase in retail price of horticulture produce and 50 per cent increase in retail price of non-perishable agricultural food when its stock price may be imposed. 

This creates room for arbitrary and subjective interpretation.  Additionally, the lack of stock limit allows corporates and traders with capacity and resources to hoard the commodities.  Hoarding of these commodities will allow them to manipulate the market.  Shortage of supply created by such hoarding will have two adverse consequences.  Firstly, it will cause the prices to exorbitantly increase. 

       Therefore, I request that this Bill should not be introduced. 

PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): Sir, under Rule 72(1), I oppose the introduction of the Essential Commodities (Amendment) Bill, 2020.  I have given a Statutory Resolution against the Ordinance which will be taken up later.

       Sir, I want to mention that this is an example of coercive federalism by the Central Government. जबरदस्ती स्टेट से पावर ली जाती है । Before, Sir, the States had the power to regulate stocks being kept by people.  It was necessary for avoiding hoarding and black-marketing or seasonal shortages during floods or droughts.  This power was wholly with the State Government.

 Now, this power is being taken over by the Central Government and the powers of the State Governments to regulate have been circumscribed.  The power to fix stock limits has been rendered illusory.  Through a provision and an explanation clause, the Ordinance has rendered the concept of stock limit illusory and meaningless.  If the Ordinance becomes an Act, hoarders will celebrate.  This is to help the hoarders.  

माननीय अध्यक्ष : मंत्री जी, क्या आप इस बिल के बारे में कुछ बोलना चाहते हैं?

श्री दानवे रावसाहेब दादाराव : अध्यक्ष जी, जब इस बिल की चर्चा होगी, तब सरकार की तरफ से सारे प्रश्नों के उत्तर दिए जाएंगे । लेकिन मैं आपके माध्यम से सम्मानीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि यह आर्डिनेंस 5 जून, 2020 को लाया गया । उस समय पूरे देश में महामारी थी और लॉकडाउन   घोषित था । उस समय किसानों की फसलें कटी हुई थीं, लेकिन कोई खरीदार नहीं था । व्यापारियों द्वारा माल उठाने में दिक्कतें थीं ।

 

 

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       दूसरी ओर उसकी मांग बढ़ रही थी । इसलिए किसानों को केन्द्र बिन्दु मान कर यह ऑर्डिनैंस लाया गया था । इन परिस्थितियों में यह आवश्यक था कि किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर प्रदान हो और कंज्यूमर्स को आवश्यक वस्तुएं आसानी से मिले । इसलिए यह ऑर्डिनैंस लाया गया था ।

       अध्यक्ष महोदय, अभी माननीय सदस्य ने कहा है कि इस ऑर्डिनैंस के लिए राज्यों के विचार नहीं लिए गए हैं । मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को सूचित करना चाहता हूं कि यह ऑर्डिनैंस लाने से पहले राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक हाई पावर कमेटी बनाई गई थी और उस कमेटी में पंजाब, ओडिशा, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे । उन मुख्यमंत्रियों ने इस समिति के सभी बिन्दुओं पर चर्चा करने के बाद निर्णय किया है कि यह बिल आना चाहिए । मुझे ऐसा लगता है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस बिल के कारण किसानों पर कोई अन्याय भी नहीं होगा ।

माननीय अध्यक्ष : प्रश्न यह है :

कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का और संशोधन करने वाले विधेयक को पुर:स्थापित करने की अनुमति प्रदान की जाए । 

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।

श्री दानवे रावसाहेब दादाराव: अध्यक्ष महोदय, मैं विधेयक को पुर:स्थापित करता हूं । …(व्यवधान)

 

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श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): सर, कोई स्टेटमेंट नहीं ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : वह विषय मेरे ध्यान में गया है । मैं उसे देखूंगा ।

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आइटम नम्बर 12. डॉ. हर्ष वर्धन जी ।

 

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